चुनाव आयोग ने देशद्रोह किया, ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो: एसआईआर विवाद के बाद विपक्ष का बड़ा हमला

नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो) । एसआईआर विवाद को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने देशद्रोह किया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। चुनाव आयुक्तों की आपत्ति पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद अब विपक्ष ने यह बड़ा हमला किया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उनको अनसुना कर दिया गया। इसके बाद विपक्ष मोदी सरकार, चुनाव आयोग और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर चैतरफ़ा हमलावर है। कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग के काम करने के तौर-तरीकों को गैर-क़ानूनी बताया है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति की रिपोर्ट आने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह पहले से ही कह रहे हैं कि चुनाव आयोग वोट चोरी करा रहा है। राहुल ने बुधवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा, वोट की चोरी भारत के लोगों के ख़िलाफ़ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ़ ज़रूर होगा।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इससे भी आगे बढ़कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। केजरीवाल ने कहा कि रिपोर्ट से चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वोट चोरी के जरिए चुनाव जीत रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को इस कथित प्रक्रिया का सरगना बताया।
केजरीवाल ने क्या सवाल उठाए?
केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त फर्सट एमन्ग ईक्वल बराबरों में पहले हैं। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार अकेले चुनाव आयोग चला रहे थे और दूसरे दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई बार लिखित रूप से इसका विरोध किया। केजरीवाल ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के नाम से लिखे गए 28 अक्टूबर 2025 के कथित पत्र का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक, इस पत्र में कहा गया था कि चुनाव आयोग के नाम से पत्र और आदेश जारी किए जा रहे थे, जबकि केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी नहीं ली गई थी। उन्होंने 16 अप्रैल 2026 के एक अन्य कथित पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें आईटी से जुड़े मॉड्यूल और पोर्टल को लेकर आपत्ति जताए जाने की बात कही गई। केजरीवाल ने कहा, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार सिर्फ ईआरओ को है, फिर दिल्ली में बैठे लोग पूरे देश की वोटर लिस्ट कैसे बदल रहे हैं?
केजरीवाल की तीन मांगें
एसआईआर का पूरा प्रोसेस कैंसिल किया जाए, एसआईआर के तहत किए गए सारे बदलाव कैंसिल किए जाएं और तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट बहाल की जाए।
ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए।
दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा,एमपी और छत्तीसगढ़ के पिछले कुछ वर्षों में हुए चुनाव कैंसिल कराकर दोबारा चुनाव कराए जाएं।
कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाया बहुमत का सवाल
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह साफ़ कर चुका है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की स्थिति को लेकर सीईसी को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त नहीं है। सिंघवी ने कहा कि सभी चुनाव आयुक्त बराबर हैं और सीईसी फर्सट एमन्ग ईक्वल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सामने आई जानकारी से लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने सहयोगियों को दरकिनार कर आयोग के कामकाज को प्रभावित किया। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को चुनाव आयोग की संस्थागत कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
कपिल सिब्बल ने कहा- ज्ञानेश कुमार के साथ बहुमत नहीं
राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग अब तीन सदस्यों वाली संस्था है और फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि संधू और जोशी ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर 14 मौकों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल निलंबित करने और एसआईआर प्रक्रिया रोकने की मांग की। सिब्बल ने चुनावी सॉफ्टवेयर और मतदाता सूची के डेटा तक पहुंच के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को मतदाता सूची में नाम जोड़ने और उससे जुड़े फैसलों पर पर्याप्त नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईआरओ की सिस्टम तक पहुंच वापस ले ली गई और इस पर दूसरे दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति की।
फॉर्म 6 में बदलाव पर सिब्बल का आरोप
सिब्बल ने फॉर्म 6 में जोड़े गए अतिरिक्त सवाल को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप था कि नए मतदाताओं से पिछली एसआईआर सूची में उनके या उनके परिवार के सदस्यों के नाम को लेकर अतिरिक्त जानकारी मांगी गई, जबकि इसके लिए औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था। सिब्बल ने इसे चुनावी प्रक्रिया में नियमों के पालन से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि इस तरह का बदलाव किस अधिकार के तहत किया गया।
क्या कहती है इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग के भीतर ही मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सवाल उठे। रिपोर्ट में कहा गया है कि संधू और जोशी ने कम से कम 14 बार लिखित रूप से आपत्ति दर्ज की। ये आपत्तियां केवल किसी सामान्य प्रशासनिक मुद्दे तक सीमित नहीं थीं। इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाना और बहाल करना, एसआईआर से जुड़े मामलों में अपील, मतदाता सूची के डेटाबेस की सुरक्षा और उसके संचालन जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। एक आपत्ति में संधू ने कथित तौर पर कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की लिखित सलाह के खिलाफ कदम उठाया गया और इसे अनएथेराइज्ड तथा इलीगल बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार बाद में संधू और जोशी ने चुनावी रोल के आईटी सिस्टम से जुड़े कामकाज में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव को भी अलग-अलग पत्र लिखे।
फॉर्म6 को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में चुनाव आयोग के फॉर्म 6 में किए गए बदलाव का भी उल्लेख है। फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए किया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस की दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर से जुड़े कुछ सवाल फॉर्म 6 के नए डिजिटल संस्करण में जोड़े गए थे। नए आवेदकों से यह बताने को कहा गया था कि उनका नाम या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तैयार मतदाता सूची में था या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई और इसे अनएथेराइज्ड तथा इलीगल बताते हुए कहा कि इसे तत्काल हटाया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?
विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि एसआईआर समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। ईसी के मुताबिक, एसआईआर और अन्य फैसलों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की भी मंजूरी थी।
विवाद का केंद्र एसआईआर और मतदाता सूची
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया है। एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करना है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पहले से ही मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली में भी एसआईआर को लेकर बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में 31.63 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें खुद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू का नाम भी शामिल था। उनके नाम से जुड़ी विसंगति बाद में सत्यापित किए जाने की बात सामने आई।