बृजेश चतुर्वेदी
लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो) । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने संकेत दिया है कि गठबंधन में सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार और सीट की जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से काफी तेज़ हो चली है। माना जा रहा है कि इस चुनाव में कांग्रेस और सपा गठबंधन के तहत ही चुनाव लड़ेगी लेकिन अभी तक सीट शेयरिंग का सटीक फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है। इसे लेकर सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी भी शुरू हो गई है, जिसके बाद नई दिल्ली में ‘इंडिया गठबंधन’ की बैठक बुलाई गई है। कयास लगाए जा रहें है कि इस बैठक में कांग्रेस-सपा के बीच सीट बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। जानकारी के मुताबिक सीट शेयरिंग को लेकर सपा ने कांग्रेस के सामने 4 शर्तें रखने का प्लान कर रही है।
अखिलेश-राहुल के बीच पहले भी हो चुकी है मीटिंग
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच कई बार हाई लेवल मीटिंग हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस फॉर्मूला नहीं निकलने के कारण सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी है सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने गठबंधन की बैठक में सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख साफ करने का प्लान बनाया है। इसके अलावा अखिलेश यादव ने ऐलान कर दिया है कि वह इस बैठक में नहीं जा रहे है और उनकी तरफ से पार्टी का कोई नेता सपा का प्रतिनिधित्व करेगा।
सपा की 4 शर्तें
सीट बंटवारे को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव शुरू से एक ही बात कहते आ रहे हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं बल्कि जीत सबसे ज्यादा जरूरी होती है। इसलिए जो प्रत्याशी जिस सीट से जीत सकता है, उसे ही टिकट मिलना चाहिए। इसी वजह से 2024 के लोकसभा चुनाव के तहत पार्टी ने अपनी 4 शर्तें रखी है।
1. सीटों का नाम: सपा चाहती है कि कांग्रेस जिन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, उसे एकदम स्पष्ट रूप से लिखकर दें।
2. प्रत्याशी का नाम: कांग्रेस सीट के साथ-साथ अपने संभावित प्रत्याशी का भी नाम दें, जिसे वो चुनाव में उतारना चाहती है।
3. क्षेत्रीय जनाधारः कांग्रेस जिन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, वहां उनका जनाधार और राजनीतिक आधार क्या है? उन्हें यह भी साफ करना होगा।
4. जीत की कितनी संभावनाः कांग्रेस जिस उम्मीदवार को मैदान में उतार रही है, उसकी वहां से जीतने की कितनी संभावना है? इसका भी आकलन किया जाना चाहिए। सपा का मानना है कि प्रत्याशी के चुनाव से ही नतीजे साफ होने लगते है।
सपा की क्या होगी रणनीति?
अखिलेश यादव के खुद बैठक में न जाने के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। चर्चाएं है कि अखिलेश यादव इस वक्त कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से आमना-सामना करने से बच रहे है हालांकि सपा ने अपनी रणनीति तय कर ली है और बैठक के दौरान सीटों की दावेदारी के साथ-साथ संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ का मुद्दा उठा सकती है। सपा का रुख साफ है कि सीटों की संख्या की बजाय जीतने वाले प्रत्याशी पर मेन फोकस रहेगा। सपा का मानना है कि सिर्फ कागजी दावों और बयानबाजी के आधार पर सीटों की मांग गठबंधन के हित में नहीं रहेगा।
