नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो) । इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दहाड़ा और उन्हें सीधे-सीधे चोर-डाकू कह दिया। ममता ने ज्ञानेश कुमार को ‘वैनिश कुमार’ पुकारते हुए उन पर वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए और तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने साफ़ कह दिया कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो विपक्ष इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन करेगा। विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च और जिला स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। इस घोषणा के दौरान ही ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ बड़ा हमला किया।
‘वैनिश कुमार चोर, डाकू है’- ममता
इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखे शब्दों में हमला किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा। ममता के मुताबिक, वैनिश कुमार चोर है, डाकू है। उसने लोगों का वोट चोरी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत से अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। ममता ने यह भी दावा किया कि ईवीएम मशीनों को जलाया गया और मतगणना में गड़बड़ी की गई। उन्होंने कहा कि देश में एक बड़ा स्कैम हुआ है और इसका नुक़सान आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उनके मुताबिक़, यदि सीईसी इस्तीफा नहीं देते हैं तो विपक्ष मिलकर ‘वोट चोरी’ के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगा। ममता ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई सिर्फ किसी एक पार्टी के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। हालाँकि, ये सभी आरोप विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर अपनी प्रक्रियाओं को क़ानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के तहत चलाए जाने की बात कही है।
‘वैनिश कुमार’ क्यों कहा?
ममता बनर्जी पहले भी ज्ञानेश कुमार के लिए ‘वैनिश कुमार’ नाम का इस्तेमाल कर चुकी हैं। सितंबर के आखिर में उन्होंने कहा था कि उन्होंने यह नाम इसलिए दिया क्योंकि उनके आरोप के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में मतदाता सूची से लोगों के नाम गायब हुए हैं। एसआईआर को लेकर विपक्ष का मुख्य आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव और नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
एसआईआर बना इंडिया गठबंधन की एकजुटता का मुद्दा
इंडिया गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर अलग-अलग दलों के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दे ने फिलहाल विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर लाने का काम किया है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था है और किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से हटना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से विपक्ष एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर जवाबदेही की मांग कर रहा है। इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद यह साफ़ हो गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर का मुद्दा अब विपक्ष के संयुक्त राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनने जा रहा है। ममता बनर्जी ने जहां सीधे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, वहीं राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जोड़ा है। खड़गे ने आंदोलन की तारीख़ों का ऐलान कर दिया है। इस तरह आने वाले दिनों में ‘वोट चोरी’, एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में ज्ञानेश कुमार पर दहाड़ीं ममता बनर्जी: ‘वैनिश कुमार चोर है, तुरंत इस्तीफा दो’
