स्वामी विवेकानंद का ‘विश्वगुरु भारत’ : खंडित विश्व के लिए वेदांत की प्रासंगिकता
(जहाँ से विश्व को दिशा मिले : विवेकानंद और विश्वगुरु भारत की संकल्पना) — डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो) इक्कीसवीं सदी का विश्व गहरे अंतर्विरोधों से घिरा हुआ है। एक ओर अभूतपूर्व वैज्ञानिक-तकनीकी प्रगति, वैश्वीकरण और संचार क्रांति है, तो दूसरी ओर युद्ध, जलवायु संकट, असमानता, नैतिक पतन और पहचान आधारित संघर्ष। यह…
