लखनऊ।( आवाज न्यूज़ ब्यूरो ) उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया है और अधिनियम का उल्लंघन रोकने की मांग की है। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को मीटर चुनने का अधिकार है। उत्तर प्रदेश के तमाम उपभोक्ताओं के घर में लगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर को बिना उनकी सहमति के प्री पेमेंट (पहले भुगतान) मोड में बदला जा रहा है। यह विद्युत अधिनियम के खिलाफ है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर आपत्ति जताई है। उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करके हस्तक्षेप करने की मांग की है।
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को मीटर चुनने का अधिकार है। उन्हें यह भी अधिकार है कि वे प्री पेमेंट (पहले भुगतान) अथवा पोस्ट पेमेंट (बाद में भुगतान) मोड का विकल्प चुनेंगे। इसी तरह ऊर्जा मंत्रालय की ओर से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले कुल उपभोक्ताओं में पांच फीसदी के यहां चेक मीटर लगाना अनिवार्य किया है। इसके बाद भी विद्युत निगमों द्वारा इन नियमों की अनदेखी की जा रही है। जहां चेक मीटर लगे हैं, वहां भी मिलान नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 32 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं। एक अगस्त 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2.54 लाख उपभोक्ताओं के स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्री पेमेंट मोड में बदला जा चुका है। उनकी जमा सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी मनी) को मीटर में रिचार्ज कर दिया गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में बदलते समय किसी भी उपभोक्ता से सहमति नहीं ली गई। जहां पांच फीसदी पुराने मीटर को चेक मीटर के रूप में स्थापित किया गया है उनका भी मिलान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की विश्वसनीयता सत्यापित नहीं हो पा रही है। तमाम उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर के तेज चलने की लगातार शिकायत कर रहे हैं। इसी वजह से मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में भार जंप होने पर सॉफ्टवेयर में बदलाव भी किया गया है। जो मीटर की कमियों को अपने आप सत्यापित कर रहा है। परिषद अध्यक्ष ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से विद्युत अधिनियम का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है।
