कप सिरप पीने से 12 बच्चों की मौत, किडनी फेलियर रहा मुख्य कारण

नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। एमपी के छिंडवाड़ा और राजस्थान के भरपुपर व सीकर जिलों से एक चौंकाने वाली दुखद खबर सामने आई है। अब तक कुल 12 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनमें किडनी फेलियर मुख्य कारण बताया जा रहा है। इन बच्चों ने कथित रूप से एक कप सिरप का सेवन किया था, जो अब जांच के घेरे में आ चुका है।
हैरानी की बात ये है कि मरने वाले सभी बच्चों की उम्र 5 साल से कम है. जानकारी के मुताबिक, पहले बच्चों को सामान्य बुखार और सर्दी की शिकायत हुई थी, जिसके बाद वहां के स्थानीय डॉक्टरों ने खांसी की दवाई दी। उससे बच्चों की हालत थोड़ी ठीक तो हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में उनके पेशाब में कमी आई और फिर अचानक किडनी फेल होने लगी। पहले 6 बच्चों की मौत हुई, फिर इसके बाद मौत का आंकड़ा बढ़ता ही चला गया। ये खबर पूरे क्षेत्र में चिंता का विषय बनी हुई है। छिंदवाड़ा इस त्रासदी से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। मध्य प्रदेश के अलावा, राजस्थान के भरतपुर और सीकर में भी तीन बच्चों की कफ सिरप से मौत होने की पुष्टि हुई है।
पहला मामला 7 सितंबर को सामने आया था जब 5 वर्षीय अदनान खान को तेज बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे नागपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं। इसके बाद लगातार नए मामले सामने आते रहे और अब तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने शुरुआती जांच में पानी और चूहों के सैंपल लिए थे, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई। वहीं, राजस्थान में भी 3 बच्चों की ऐसे ही मौत हुई है, यानि दोनों राज्यों में कुल मिलाकर 12 मौत हुई हैं। सीकर में एक बच्चे को खांसी की प्रतिबंधित दवा लिखने पर एक्शन हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक और
फार्मासिस्ट पर सस्पेंड करने का निर्णय लिया है। पूरे मामले को लेकर हेल्थ डिपार्टमेंट ने एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में चिकित्सकों को सलाह दी गई है कि बाल रोगियों का विशेष ध्यान रखा जाए। खांसी के लिए Dextromethorphan साल्ट वाले सिरप का प्रयोग यथासंभव न करें। 4 वर्ष से कम आयु के बच्चों में यह दवा न दें, बच्चों में खांसी के कारण की पहचान कर उसका उपयुक्त उपचार करें। Dextromethorphan देते समय परिजन को दुष्प्रभाव और सुरक्षित खुराक की जानकारी दें। यदि किसी बच्चे में Dextromethorphan के दुष्प्रभाव की जानकारी प्राप्त होती है, तो तुरंत जिला अधिकारी के माध्यम से निदेशालय को अवगत करवाएं।
1 लाख 33 मरीजों को दी गई ये दवा
28 सितम्बर को दवा Dextromethorphan के संबंध में शिकायत होने के बाद सम्पूर्ण प्रकरण की जांच के लिए विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है। इस कमेटी में आरएमएससीएल के कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), कार्यकारी निदेशक (लॉजिस्टिक) एवं मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के नोडल अधिकारी को शामिल किया गया है। यह कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। बताया जा रहा है कि खांसी की ये दवा अब तक 1 लाख 33 हजार से अधिक मरीजों को वितरित की जा चुकी है, लेकिन 28 सितम्बर से पहले एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। वहीं इससे पहले डच् में दो कफ सिरप पर भी संदेह जताया गया। जिसके बाद कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने चिकित्सकों की सलाह पर Coldrif और Nextro-DS सिरप पर तत्काल रोक लगाई। मेडिकल स्टोर्स को निर्देश दिया कि बच्चों को केवल प्लेन सिरप ही उपलब्ध कराएं। परासिया क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि नल से पीला और गंदा पानी आ रहा है, जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आपको बता दें,कि छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया- जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें से कई की किडनी बायोप्सी जांच कराई गई। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कफ सिरप में मिला डायएथिलीन ग्लायकॉल दूषित पाया गया है। यही सिरप इन बच्चों को दिया गया था, जिससे उनकी किडनी फेल हुई।