‘‘योजना का नाम मनरेगा से बदलकर जी- राम -जी करना महात्मा गांधी का अपमान‘‘
फर्रुखाबाद। (आवाज न्यूज ब्यूरो) वामपंथी दलों के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के अंतर्गत महात्मा गांधी ग्रामीण राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून(मनरेगा) को समाप्त कर केन्द्र में काबिज मोदी सरकार द्वारा विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल,लागू करने के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मार्क्सवादी)जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा लोकसभा में लम्बी बहस और विपक्षी दलों के सभी संसदसदस्यों के पुरजोर विरोध के बाद भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून(मनरेगा) को समाप्त कर उसके स्थान पर विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन(ग्रामीण) बिल 2025 भाजपा की केन्द्र सरकार ने पारित करा लिया ।
ज्ञापन में कहा गया कि मनरेगा सभी को काम पाने का अधिकार देता है । जबकि नया कानून सभी को कम से वंचित कर देता है। खेती के पीक सीज़न के दौरान 60 दिनों तक रोज़गार रोकने से ग्रामीण मज़दूरों को उस समय काम नहीं मिलेगा जब इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी और वे ज़मींदारों पर निर्भर हो जाएंगे। ज़रूरी डिजिटल अटेंडेंस मज़दूरों के लिए बहुत मुश्किलें पैदा करती है, जिसमें काम का नुकसान और उनके अधिकारों से वंचित होना शामिल है। योजना का नाम मनरेगा से बदलकर जी- राम -जी करना महात्मा गांधी का अपमान है। ज्ञापन में मांग की गई ज्ञापन में मांग की गई की जी राम जी बिल को वापस लिया जाए और मनरेगा को दोबारा लागू किया जाए, और कम से कम 200 दिन का न्यूनतम रोजगार सुनिश्चित करने के लिए जरूरी फंड आवंटित करें तथा न्यूनतम मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन की गारंटी दी जाये।
ज्ञापन देने वालों में सुनील कुमार कटियार जिला मंत्री, बलवीर सिंह, नरवीर सिंह, रामकुमार शर्मा, जगदीश चंद्र, रक्षपाल सिंह, प्रमोद कुमार शाक्य, अभिषेक कुमार आदि मौजूद रहे।
केन्द्र में काबिज मोदी सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर किसानों को दिया धोखा