फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो) कायमगंज में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम व अनुगूंज के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में अध्यक्ष प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि अटल जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्राप्त संस्कारों से पुष्पित और पल्लवित हुए। वे पत्रकारिता की कठोर साधना से तपे और निखरे। कविता ने उन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान की अभिव्यक्ति का माध्यम दिया। उनकी भाषण कला का जादू सबके सिर पर चढ़कर बोला। राजनीति जैसी काजल की कोठरी में रहकर भी बेदाग रहे।
प्रोफेसर कुलदीप आर्य ने कहा कि भारतीय राजनीति के इतिहास में अटल जी का लोकप्रिय व्यक्तित्व एवं चरित्र ध्रुव तारे की तरह अटल है। गीतकार पवन बाथम ने कहा कि हमें कई बार अटल जी के साथ राष्ट्रीय कई मंचों पर काव्य पाठ का सौभाग्य मिला । अटल जी विनम्र मिलनसार और विनोद प्रिय एवं ओजस्वी कवि थे उन्होंने हमेशा नई पीढ़ी के कवियों को प्रेरणा दी। पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर, प्रधानाचार्य शिवाकांत शुक्ला, वीएस तिवारी तथा डॉक्टर सुनील सिद्धार्थ ने कहा कि आज के आपाधापी के दौर में अटल जी की कमी महसूस होती है। उन्होंने कभी दबाव में काम नहीं किया। उनका विराट व्यक्तित्व सब पर भारी पड़ता था। युवा कवि अनुपम मिश्रा ने कहा
राजनीति कलुषित हुई हावी है उन्माद।
ऐसे में आती है बहुत अटल तुम्हारी याद।।
छात्र यशवर्धन ने कहा
जो सबको छाया दे सबके आए काम।
रख दो उस बट वृक्ष का अटल बिहारी नाम।।
गोष्ठी में जेपी दुबे, रुखसार आदि लोग उपस्थित रहे।
स्व.अटल बिहारी वाजपेई जयंती : गोष्ठी में डाला गया व्यक्तित्व पर प्रकाश

