एसआईआर ने सच साबित की योगी की आशंका

सपा के मुकाबले भाजपा की सीटो पर कट गए ज्यादा वोट

बृजेश चतुर्वेदी

लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने ने सीएम योगी की आशंका को सच साबित कर दिया। यूपी में सपा की तुलना में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर वोटर ज्यादा कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटों पर एक जैसा है।

योगी ने प्रदेश भाजपा संगठन, सरकार और संघ की समन्वय बैठकों में इसकी आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि एसएआर को लेकर कार्यकर्ताओं को उदासीनता तोड़नी होगी। अगर अभी बूथ लेवल की इस लड़ाई को नहीं जीत पाए, तो विधानसभा चुनाव में हमारी तैयारी अधूरी रह जाएगी।

अब सवाल है कि क्या भाजपा को नए सिरे से अपनी रणनीति बुननी पड़ेगी? सीएम योगी, कुंडा विधायक राजा भैया, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत तमाम हाईप्रोफाइल सीटों पर कितना बदलाव हुआ?

पहले यूपी की 403 सीटों पर एसआईआर का असर जानिए

यूपी की 403 सीटों में मौजूदा वक्त में भाजपा 257, सपा 102, अपना दल 13, रालोद 9, सुभासपा 6, निषाद पार्टी 5, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक व कांग्रेस 2-2, बसपा 1 सीट पर काबिज हैं। SIR के बाद यूपी में 2.04 करोड़ वोटर घटे हैं। यानी हर सीट पर औसतन 13.24% वोटर कम हुए हैं।

लेकिन हम जैसे ही आंकड़ों पर नजर दौड़ाते हैं, अंतर साफ नजर आता है। सपा की तुलना में भाजपा की सीटों पर ज्यादा वोट कटे हैं। यूपी में 102 शहरी सीटें हैं। इनमें सपा को 2022 में 19 पर जीत मिली थी। इन सीटों पर 26 हजार से 1.07 लाख तक वोटर कम हुए हैं। वहीं, एनडीए की 83 सीटों पर 26 हजार से लेकर 3.16 लाख तक वोटर्स कम हुए हैं।

इसी तरह ग्रामीण इलाकों की 301 सीटों में सपा ने 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन सीटों पर 16 हजार से लेकर 79 हजार तक वोट कम हो गए हैं। वहीं, भाजपा की 176 सीटों पर 15 हजार से लेकर 1.42 लाख तक वोटर्स कम हुए हैं।

अपना दल की 11 सीटों पर 27 से 72 हजार तक, सुभासपा की 5 सीटों पर 28 से 50 हजार तक, निषाद की 6 सीटों पर 30 से 59 हजार तक, रालोद की 7 सीटों पर 27 से 48 हजार तक वोट कम हुए हैं।

आप पिछले दो चुनावों को देखें। 2017 के चुनाव की तुलना में 2022 के चुनाव में हार-जीत का मार्जिन काफी कम रहा था। यही वजह रही कि भाजपा ने 60 से ज्यादा सीटें 10 हजार से भी कम अंतर से जीती थीं।