कन्नौज: शिवशक्ति अखाड़े के महंत बोले- आतंक का पर्याय है जामिल, गैंगेस्टर के तहत हो कार्रवाई

 स्वतंत्रता सेनानी के परिवार पर किया हमला

बृजेश चतुर्वेदी

कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। जिले के ठठिया थाना क्षेत्र के उमरन गांव में एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर शिवशक्ति अखाड़े के महंत मधुराम शरण शिवा ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की।

यह घटना 8 अप्रैल की शाम को हुई थी, जब गांव के दबंग जामिल सिद्दीकी और कामिल सिद्दीकी ने अपने साथियों के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. चंद्रिका प्रसाद शुक्ला के प्रपौत्र प्रताप नारायण शुक्ला और उनके परिवार पर हमला कर दिया था। इस हमले में परिवार के चार सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

प्रताप नारायण शुक्ला की शिकायत पर ठठिया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था, लेकिन पुलिस से आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। घटना के 10 दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस की इस ढिलाई से ग्रामीणों में भी असंतोष है।

पुलिस की लापरवाही की जानकारी मिलने पर शिवशक्ति अखाड़ा के महंत मधुराम शरण शिवा शनिवार दोपहर उमरन गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की पूरी जानकारी ली। महंत ने पुलिस के ढीले रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जामिल सिद्दीकी क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना हुआ है और उसके पुराने मुकदमों को देखते हुए उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाया जाना चाहिए।

इस दौरान कन्नौज के कोतवाली प्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह और ठठिया थाना प्रभारी संजीव कुमार भी मौके पर मौजूद थे। इंस्पेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने आश्वासन दिया कि इस घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, जो एक उदाहरण बनेगी।

ग्रामीणों ने बताया कि जामिल सिद्दीकी पेशेवर अपराधी है। पुलिस कर्मियों की राइफल छीनने से लेकर जानलेवा हमले समेत कई संगीन मामले उस पर दर्ज हैं। इसके बावजूद ठठिया थाना पुलिस उस पर मेहरबान रहती है।

उन्होंने कहा, औसेर चौकी इंचार्ज का उसके घर आना-जाना रहता है और हर केस में उसे बचाने का प्रयास करते रहते है। ग्रामीणों के आरोपों को देखते हुए महंत मधुराम शरण ने एसपी बिनोद कुमार से फोन पर बात की और चौकी इंचार्ज पर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की।

जामिल को बचाने में नप चुके ट्रेनी सीओ और थाना इंचार्ज

करीब एक साल पहले उमरन गांव में प्राचीन टीले का अवैध खनन करवा कर जामिल और उसके सहयोगी निगल गए। हिन्दूओं के धार्मिक चबूतरे को मजार में तब्दील कर दिया। जब ये मामला सामने आया तो थाने में हिंदूवादी संगठनों में विरोध किया।

जामिल समेत उसके सहयोगियों पर कार्यवाही की मांग की, लेकिन पुलिस ने जामिल को बचाने के लिए हिंदूवादी संगठन के लोगों पर ही कार्यवाही कर दी। इसके अलावा मीडिया पर भी दबाव बनाने का प्रयास करते हुए कई पत्रकारों को नोटिस थमा दी थीं। हालांकि जब मामला हाइलाइट हुआ तो तत्कालीन ट्रेनी सीओ कुलवीर सिंह और थाना प्रभारी अरुण चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया गया था।