मल्लिकार्जुन खड़गे ने रखी तीन मांगें: मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, एसआईआर को रद्द करना और बैलट पेपर से चुनाव

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी पार्टी की तीन मांगें ऐसी हैं, जिन पर कोई समझौता पार्टी नहीं करेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर को रद्द करना और बैलट पेपर से चुनाव कराना। मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि देश में लोकतंत्र बचाने के लिए यह जरूरी है, उनकी पार्टी और कार्यकर्ता इस मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को कहा कि इन मुद्दों पर देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल सड़कों पर हैं। उन्होंने कहा है कि जो भी सिविल सोसायटी सदस्य और युवा संगठन देश में अलग-अलग जगह इन मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं, पार्टी उनके साथ खड़ी है। कांग्रेस पार्टी की 3 मांगें नॉन निगोशिएबल हैं। पहली, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा। दूसरी, एसआईआर को रद्द करना। तीसरी, बैलेट पेपर पर चुनाव कराना। देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के साथी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। जो भी सामाजिक संगठनों के सदस्य है और युवा संगठन हैं, इन मुद्दों पर देश में जगह-जगह संघर्ष कर रहे है, हम उनके साथ हैं।
क्यों अहम है मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान?
मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान 3 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद आया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और कुछ अन्य संगठनों ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जंतर-मंतर के पास हुए इस आंदोलन में आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण समेत कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की।
पुरानी मांग पर घिरती जा रही है सरकार?
30 सितंबर को इंडिया गठबंधन के दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ यही तीन मांगें रखी थीं। नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में गठबंधन की समन्वय बैठक हुई थी। इसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने देशव्यापी कार्यक्रम का ऐलान किया था। 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाला जाएगा। विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में विपक्षी नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। सरकार पर ज्ञानेश कुमार की वजह से नई मुसीबत आ गई है।
चुनाव आयोग के कामकाज पर क्यों बढ़ा विवाद?
चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद की स्थिति गहराती जा रही है। विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए हैं। इस मामले ने तब तूल पकड़ा, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने बीते 10 महीनों में अहम फाइलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। ये फाइलें एसआईआर और अन्य चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं की थीं।
किन बातों को लेकर असहमत थे आयुक्त?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियां फॉर्म 6, मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों पर थीं। चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज किया है कि ये आपत्तियां अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति थीं। आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट के स्तर पर उठाए गए सवाल, सुझाव और इनपुट उसकी सामान्य प्रशासनिक और फैसले लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर का कार्यक्रम तय करने वाले फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। बीजेपी ने दिल्ली में महिला पत्रकारों का उत्पीड़न किया, वह बेहद निंदनीय है। तानाशाह बहुत घबराया हुआ है, ध्यान भटकाने के एक और अध्याय के लिए तैयार रहिए।
प्रदर्शन पर पुलिस क्या कह रही है?
डीसीपी नेहा यादव के मुताबिक, इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। प्रदर्शनकारियों को जगह खाली करने की चेतावनी दी गई। नहीं मानने पर उन्हें हिरासत में लिया गया। हिरासत के बाद खुद को पत्रकार बताने वाली तीन महिलाओं ने शिकायत दी। उनका आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर कानून-व्यवस्था संभालते समय पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और यौन उत्पीड़न किया।