सत्ता, शहादत और सवाल
क्यों जलियाँ की चीख सुन, सत्ता है अब मौन? लाशों से ना सीख ली, अब समझाये कौन॥ डायर केवल नाम था, सोच भरी है आज। वर्दी बदली, मन वही, वही लहू की लाज॥ सत्य कहे “गद्दार” हो, चुप रहकर हो “भक्त”। लोकतंत्र है या यहाँ, जंजीरों का वक्त॥ लूटते भला किसान हो, या छात्र अनुद्रोह।…
