संविधान हत्यारे कौन? – जब अवसरवाद शर्म को भी खा जाता है

आपातकाल: लोकतंत्र पर लगा पहला आधिकारिक तालाजनता ने विरोध किया, फिर क्षमा भी दीबदले हुए चेहरे, वही मौकापरस्तीआज की सत्ता क्या सच में लोकतांत्रिक है?संविधान की हत्या के असली अपराधी कौन? राजनीति में परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन चरित्रहीनता नहीं। आज जो नेता इंदिरा गांधी को कोसते हुए ‘संविधान बचाओ’ का नारा लगा रहे हैं, कल…

संपादकीय रिक्त है — क्योंकि लोकतंत्र अभी मौन है।

“जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत” आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन आत्म-सेन्सरशिप, भय और ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर विचारों का गला घोंटा जा रहा है। सवाल पूछना देशद्रोह बन गया है, और संपादकीय अब सत्ता के प्रवक्ता हो गए…

पेंशन का अधूरा वादा : भारत के बुज़ुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई

भारत आज जनसंख्यिकीय संक्रमण के उस मोड़ पर खड़ा है, जहाँ युवाओं की अधिकता के पीछे छिपी एक चुप्पी है — बुज़ुर्गों की बढ़ती आबादी, जिनके पास न आय का स्रोत है, न सामाजिक सुरक्षा का भरोसा। जिस देश में “बुजुर्गों को आशीर्वाद का भंडार” माना जाता है, वहाँ उनकी वृद्धावस्था की सबसे बड़ी सच्चाई…

पिता का पस्त मन और पुत्रों की पश्चिमी व्यस्तता

“एक पिता की विदाई, और समाज की परीक्षा” लखनऊ के एक रिटायर्ड कर्नल ने अपने बेटों को एक मार्मिक पत्र लिखकर आत्महत्या कर ली। दोनों बेटे अमेरिका में बसे थे और मां की मृत्यु पर भी पूरी संवेदनशीलता नहीं दिखा सके। पिता ने पत्र में लिखा कि उन्होंने देश को सम्मान दिया लेकिन समाज को…

पूर्व सांसद छोटे सिंह को ’श्रद्धांजलि’ देने पूर्व महानगर अध्यक्ष सरल दुवे के साथ पहुंचे डा राजपाल कश्यप

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। आज समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ’डा० राजपाल कश्यप पूर्व एमएलसी’ ने जनपद फर्रुखाबाद पहुँचकर पिछले दिनों दिवंगत हुए भूतपूर्व सांसद/विधायक ’स्व० श्री छोटे सिंह यादव जी’ के पटेल पार्क पल्ला स्थित आवास पर पहुँच कर उन्हें ’श्रद्धांजलि’ अर्पित की एंव शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर ढाढ़स बंधाया।पूर्व एमएलसी ने कहा…

कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा : हर बार अमिताभ क्यों?

 प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। सरकार को समझना चाहिए कि चेतावनी सिर्फ चेतना के लिए होती है, प्रताड़ना के लिए नहीं। एक बार, दो बार, चलिए तीन बार — पर हर कॉल पर वही ट्यून, वही स्क्रिप्ट, वही अंदाज़ — यह सिर्फ संचार व्यवस्था को बोझिल नहीं बना रही, बल्कि जनता का भरोसा भी…

हमारी जाति एचएयू : हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन और जातिगत अन्याय के खिलाफ उठती आवाज

(विश्वविद्यालय: शिक्षा का मंदिर या जाति की प्रयोगशाला?)  हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू), हिसार – देश के प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों में गिना जाता है। पर आज यह संस्थान छात्रों के लिए जातिगत अपमान और प्रशासनिक चुप्पी का केंद्र बन गया है। “हमारी जाति एचएयू” यह नारा केवल नारा नहीं रहा, यह छात्रों की पहचान, आत्मसम्मान और…

भविष्य बताने वाले, वर्तमान से बेख़बर क्यों

(देश में इतने बड़े-बड़े भविष्य वक्ता… फिर भी किसी बड़े हादसे की ख़बर तक नहीं मिलती?)  जब आपदा आई और बाबा ऑफलाइन थे नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। जो लोग दावा करते हैं कि उनका “ऊपर वाले से सीधा संपर्क” है, वे हर बड़ी आपदा, दुर्घटना या संकट के समय चुप क्यों हो जाते हैं? क्या…

संकीर्ण जीवन-दृष्टि और टूटती नैतिक रीढ़

 “जब जीवन का अर्थ सिर्फ संपत्ति रह जाए”   “अच्छे जीवन की भूलभुलैया: क्या खोया, क्या पाया?” नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। आधुनिक समाज में “अच्छे जीवन” की जो धारणा प्रचलित है, वह दिन-ब-दिन और भी अधिक संकीर्ण, आत्मकेन्द्रित और भौतिकतावादी होती जा रही है। जीवन के उद्देश्य को अब केवल आर्थिक सफलता, सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत…

आधी आबादी, अधूरी भागीदारी : ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत की गिरती साख

 प्रियंका सौरभ, कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। 21वीं सदी की सबसे बड़ी क्रांतियों में एक है—महिलाओं की भागीदारी का बढ़ना। फिर भी, जब वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम ने ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2025 जारी किया, तो भारत का 131वां स्थान यह संकेत देता है कि विकास के तमाम दावों के बावजूद महिला सशक्तिकरण केवल…