भीमराव अंबेडकर और आज : विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन?

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा और सामाजिक न्याय को हथियार बनाया, और जाति व्यवस्था का खुला विरोध किया। आज उनका नाम हर मंच पर लिया जाता है, लेकिन उनके विचारों को गंभीरता से अपनाया नहीं जाता। आरक्षण को राजनीतिक हथियार…

शासकों के लिए आज भी आदर्श हैं विक्रमादित्य : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि महाराजा विक्रमादित्य ने अपने शासन काल में कला संस्कृति, साहित्य और विज्ञान के विकास को संरक्षण और संवर्धन के साथ जो मूल्य स्थापित किए, कालान्तर में वे ही भारत की सांस्कृतिक आदर्श एवं पहचान बने। उपराष्ट्रपति धनखड़ शनिवार शाम यहां लाल किला परिसर स्थित…

राहुल गांधी की मुहिम का कर्नाटक में असर : ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) कर्नाटक में जातिगत जनगणना के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण को 32 फीसदी से बढ़ाकर 51 फीसदी करने की सिफारिश की गई है। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, ओबीसी की आबादी 70 फीसदी है। अगर यह लागू होता है, तो कुल आरक्षण 85 फीसदी तक हो जाएगा……

“जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी”

 प्रियंका सौरभ हर चौक-चौराहे पर अब, सजती है एक माला,बाबा साहब की तस्वीरें, और सस्ती सी दीवाला।नेता भाषण झाड़ रहा है, मंच सजा है भारी,पर संविधान की आत्मा है, अब भी बहुत बेचारी। टोपियाँ नीली, झंडे ऊँचे, लगती क्रांति की टोली,लेकिन सवाल ये उठता है — कहाँ है वो भूली बोली?जो कहती थी “हम सब…

बाबा साहेब की विरासत पर सत्ता की सियासत, जयंती या सत्ता का स्वार्थी तमाशा?

बाबा साहब के विचारों—जैसे सामाजिक न्याय, जातिवाद का उन्मूलन, दलित-पिछड़ों को सत्ता में हिस्सेदारी, और संविधान की गरिमा की रक्षा—को आज के राजनेता पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। राजनीतिक दल केवल वोट बैंक के लिए अंबेडकर की जयंती मनाते हैं, जबकि वे उनके विचारों से कोसों दूर हैं। जिन मुद्दों के लिए बाबा साहब…

लोकतांत्रिक भारत: हमारा कर्तव्य, हमारी जिम्मेवारी

(अंबेडकर जयंती विशेष)  जनतंत्र की जान: सजग नागरिक और सतत भागीदारी लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्याय, समानता, संवाद, स्वच्छता, कर भुगतान, और संस्थाओं…

सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये। 

भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट कटौती, ढांचागत कमी और शिक्षकों की अनुपलब्धता ने इनकी साख गिराई है। हरियाणा इसका ताजा उदाहरण है, जहाँ 2022 में 292 स्कूल बंद हुए, और 2024 में 800 और स्कूलों को बंद करने की योजना है। सरकारें नामांकन की कमी…

सत्ता, शहादत और सवाल

क्यों जलियाँ की चीख सुन, सत्ता है अब मौन? लाशों से ना सीख ली, अब समझाये कौन॥ डायर केवल नाम था, सोच भरी है आज। वर्दी बदली, मन वही, वही लहू की लाज॥ सत्य कहे “गद्दार” हो, चुप रहकर हो “भक्त”।  लोकतंत्र है या यहाँ, जंजीरों का वक्त॥ लूटते भला किसान हो, या छात्र अनुद्रोह।…

अच्छी खबर! फिर से शुरु हुई पेटीएम,फोनपे और गूगलपे की सर्विस, यूजर्स को मिली राहत

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में शनिवार दोपहर को यूपीआई सर्विस कुछ समय के लिए ठप हो गई। इस दौरान लाखों लोग पेटीएम,फोनपे और गूगलपे जैसे ऐप्स के जरिए भुगतान नहीं कर पा रहे थे। कुछ समय बाद ये सर्विस सामान्य तौर पर शुरु हो गई हैं। सर्विस दोबारा शुरु…

वक्फ बिल पर दिग्विजय सिंह का बडा सवाल? : क्या मंदिर ट्रस्ट में गैर-हिंदू सदस्य हो सकते हैं?

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) संसद के दोनों सदनों में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 बहुमत के साथ पारित हो गया है। लेकिन विपक्ष इसे लेकर विरोध जता रहा है। इसी मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया है कि वह वक्फ कानून को…