जनपद फर्रूखाबाद के कस्बा शमशाबाद का गौरवशाली इतिहास

(एक विशेष रिपोर्ट)
महेश वर्मा

फर्रूखाबाद/शमशाबाद। (आवाज न्यूज ब्यूरो) ।  गंगा के पावन तट पर बसा शांत सा दिखने वाला कस्बा शमशाबाद, आज भले ही आम कस्बों जैसा लगे, लेकिन इसकी मिट्टी में 2500 साल पुराना इतिहास दफन है। यह वही धरती है जो कभी दिल्ली सल्तनत की अस्थायी राजधानी तक रही है।
समाचार में मुख्य बिंदु:

  1. 2500 साल पुरानी सभ्यता के प्रमाण
    शमशाबाद और इसके आसपास फैले प्राचीन टीलों, खंडहरों की खुदाई में पुरातत्व विभाग को उत्तरी काली पॉलिश वाले मृद्भांड (Northern Black Polished Ware – NBPW)और प्राचीन सिक्के मिले हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि यहाँ ईसा से 500 साल पहले भी एक विकसित नगरीय सभ्यता मौजूद थी।
  2. प्राचीन नाम था खोर नगर – राजा खोर की नगरी
    मध्यकालीन ऐतिहासिक ग्रंथ तारीख-ए-फिरोजशाही में इस स्थान का उल्लेख खोर नगर के नाम से मिलता है। 9वीं से 12वीं शताब्दी तक यहाँ पहले प्रतिहार वंश और बाद में कन्नौज के गहड़वाल राजवंश का शासन रहा। यहाँ के प्रतापी राजा खोर भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्होंने एक ऊँचे टीले पर विशाल किले का निर्माण कराया था। आज उसी किले के अवशेषों पर शमशाबाद की जामा मस्जिद स्थित है। राजा खोर के समय का बनवाया गया चौमुखी शिव मंदिर आज भी मौजूद है, जो लगभग 800 साल पुराना बताया जाता है और कन्नौज के हर्षकालीन गौरीशंकर मंदिर के बाद का महत्वपूर्ण शिव मंदिर है।
  3. शमशाबाद नाम कैसे पड़ा और कैसे बना दिल्ली की राजधानी
    कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत के प्रसिद्ध शासक शम्सुद्दीन इल्तुतमिश के सम्मान में खोर नगर का नाम बदलकर शमसाबाद रखा गया।
    इतिहास का सबसे रोचक पन्ना यह है कि जब दिल्ली में भीषण जल संकट उत्पन्न हुआ, तो उस समय के सुल्तान ने कुछ समय के लिए शमशाबाद को ही दिल्ली सल्तनत की अस्थायी राजधानी बना दिया था। सामरिक रूप से गंगा के किनारे होने के कारण इसका महत्व बहुत ज्यादा था।
  4. युद्धों का गवाह – गंज-ए-शहीदां
    यह कस्बा कई बड़ी लड़ाइयों का गवाह रहा है।
    लोधी शासकों और जौनपुर के शर्की सुल्तानों के बीच हुए भीषण युद्ध यहीं हुए। युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को यहीं दफनाया गया, जिसके कारण यह स्थान श्गंज-ए-शहीदांश् (शहीदों की बस्ती) के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
    खिज्र खान और सिकंदर लोदी भी यहाँ आए। सिकंदर लोदी ने जहाँ अपना सैन्य शिविर लगाया था, वह जगह आज श्सिकंदरपुर महमूदश् कहलाती है।
  5. मुगल काल में शमशाबाद
    सन् 1528 में मुगल सम्राट बाबर ने विक्रमजीत सिसोदिया को शमशाबाद का गवर्नर नियुक्त किया।
    हुमायूँ जब शेरशाह सूरी से हार गया था, तो वह शमशाबाद के रास्ते से ही दिल्ली गया था।
    सम्राट अकबर के शासनकाल में शमशाबाद को कन्नौज सरकार का एक महत्वपूर्ण परगना बनाया गया। यहाँ के अधिकारी मिर्जा ताहिर और राय दामोदर दास थे। आज भी पास का अकबरपुर दामोदर गाँव उनकी याद दिलाता है। स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि शमशाबाद का इतिहास केवल ईंट-पत्थरों में नहीं, बल्कि यहाँ की संस्कृति और लोककथाओं में जीवित है। यह उत्तर भारत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास का एक अनछुआ अध्याय है, जिसे संरक्षण और शोध की सख्त जरूरत है।