किताबें उधार नहीं, अनुभूति होती हैं
(जब समाज सेवा की शुरुआत दूसरों की अलमारी से होती है, तो किताबें वस्तु बन जाती हैं, अनुभूति नहीं।) किताबों का रिश्ता सिर्फ़ कागज़ और अक्षरों का नहीं होता, यह मन और आत्मा का संवाद है। आज जब लोग समाज सेवा या मित्रता के नाम पर किताबें माँगते हैं, तो यह सवाल उठता है —…
