भारतीय समाज में मासिक धर्म अभी तक कलंकित क्यों?

भारत के पास मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति अधिक समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक विचारों का सम्मान करने का अवसर है। आपके क्या विचार हैं-क्या सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, या जमीनी स्तर के संगठनों को बदलाव लाने में आगे आना चाहिए? मासिक धर्म से जुड़ा कलंक कई संस्कृतियों में…

फतेहगढ़ ब्रह्मदत्त स्टेडियम में ‘महिला शक्ति संवाद’ का आयोजन, बालिकाओं को किया गया प्रेरित

फर्रुखाबाद। (आवाज न्यूज ब्यूरो) महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ब्राह्मदत्त स्टेडियम, फतेहगढ़ में ‘महिला शक्ति संवाद’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री मोनिका यादव , डॉक्टर रजनी सरीन,एवं सीओ सिटी ऐश्वर्या उपाध्याय ने छात्राओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम के…

पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत एवं पूर्व जिला अध्यक्ष महिला सभा शर्मिष्ठा यादव ने मनाया महिला दिवस’

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  आज समाजवादी पार्टी की पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत एडवोकेट ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विश्व की उन समस्त महिलाओं के प्रति सादर श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने सामंतवाद, रूढ़िवाद और अंधधर्मवाद, स्त्री के शोषण के विभिन्न रूपों के खिलाफ संघर्ष करने और स्वतंत्रता संग्राम में प्राणाहुति दी है। यौन उत्पीड़न, पारिवारिक…

कन्नौज :  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कई सफल नारियों का सम्मान

बृजेश चतुर्वेदी कन्नौज। (आवाज न्यूज ब्यूरो) अध्यक्ष, जिला पंचायत प्रिया शाक्य, विधायक छिबरामऊ अर्चना पाण्डेय, विधायक तिर्वा कैलाश राजपूत, जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल, जिला अध्यक्ष भाजपा वीर सिंह भदौरिया तथा मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट प्रांगण में ’स्वस्थ नारी सशक्त नारी, सशक्त नारी सुरक्षित समाज, लाडली रक्षा…

सार्थक भागीदारी से “एक्सीलरेट एक्शन” के लिए काम करती प्रियंका ‘सौरभ’

*महिला दिवस विशेष*  (लेखिका होने के अलावा शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्त्ता भी है प्रियंका सौरभ। महिला सशक्तिकरण, हिन्दी भाषा, भारतीय सभ्यता और विरासत, धर्म, संस्कृति और बच्चों और महिलाओं के लिए साहित्यिक और शैक्षिणिक गतिविधियाँ, सामाजिक सरोकारों को लेकर कार्य करती है। देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर साहित्यिक, सामाजिक,सांस्कृतिक, महिलाओं और बच्चों से जुड़े…

सार्थक भागीदारी के बिना कैसे हल होंगे आधी दुनिया के मसले

महिला दिवस विशेष:- (अगर आधी आबादी से होते हुए भी महिलाएँ इस आबादी की कहानियाँ नहीं कहेंगी, तो कौन कहेगा? केवल महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज़ महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़ेगी इस बदलाव के लिए, अपने हक़ों के लिए। छोटी शुरुआत ही सही, लेकिन शुरुआत सबको करनी पड़ेगी। ये संघर्ष का सफ़र अंतहीन है।…

कम नहीं है त्रिभाषा नीति के पालन में आने वाली चुनौतियाँ

भारत में भाषा शिक्षा को लेकर चर्चा अभी भी जारी है। तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति के प्रति कड़ा विरोध भाषाई पहचान और केंद्र सरकार की नीतियों के बारे में महत्त्वपूर्ण चिंताओं को उजागर करता है। वास्तविक शैक्षिक सुधार के लिए भाषा शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाना आवश्यक है, न कि केवल नीतिगत ढाँचों पर ध्यान…

पच्चास साल बाद होने वाली परिसीमन को लेकर चिंताएँ

राजकोषीय संघवाद और संस्थागत ढांचे को मज़बूत करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राजनीतिक निष्पक्षता जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ मिलीजुली हो, जिससे एक सुसंगत और एकजुट भारत को बढ़ावा मिले। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और शासन में सुधार होगा।…

क्यों क्रूर बदमाशी का रूप ले रही है रैगिंग?

(परंपरा से आतंक तक) रैगिंग को अक्सर एक संस्कार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो नए छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में परिसर में जीवन को समायोजित करने में सहायता करता है। हालाँकि जूनियर कैंपस के रीति-रिवाजों को सीख सकते हैं और वरिष्ठों के साथ सकारात्मक बातचीत के माध्यम से एक सहायक समुदाय…

शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव है महिला अध्यापिकाओं की बढ़ती संख्या।

 महिलाओं द्वारा संचालित कक्षाओं में समावेशी भागीदारी 20% अधिक होती है। सामाजिक बाधाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करके, महिला शिक्षकों की उपस्थिति लड़कियों के शैक्षिक अवसरों को बढ़ाती है। महिला शिक्षकों की संख्या में वृद्धि के कारण बिहार की कन्या उत्थान योजना में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। लिंग भूमिकाओं, बाल…