लोकलुभावन राजनीति और राज्यों पर बढ़ता ऋण बोझ
डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत में राज्यों का लगातार बढ़ता ऋण-से-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात आज केवल एक आर्थिक संकेतक नहीं, बल्कि देश की वित्तीय स्थिरता और सहकारी संघवाद के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में अधिकांश राज्यों का सार्वजनिक ऋण तेजी से बढ़ा है। राजस्व घाटे, लोकलुभावन योजनाओं,…

