बाज़ार के जहरीले आईने – जब लोग उपभोक्ता बन जाते हैं, इंसान नहीं
आज का समाज उपभोक्ता संस्कृति का गुलाम बन चुका है। लोग जरूरत के लिए नहीं, बल्कि दिखावे के लिए चीजें खरीद रहे हैं। मोबाइल फोन से लेकर कपड़ों तक, हर वस्तु अब पहचान और प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गई है। “लोग क्या कहेंगे” के डर में लोग कर्ज में डूबते जा रहे हैं। असली जरूरतें…
