बसपा का आखिरी किला भी ढह गया, उमाशंकर सिंह के निधन से बलिया में खालीपन
‘‘योगी के भरोसेमंद, दयाशंकर के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी, त्रिभुवन राम के करीबी, सिंगापुर तक था धंधा, कैंसर ले गया, न दोस्त भी समझ पाए, न दुश्मन कभी हरा नहीं पाये’’बृजेश चतुर्वेदीलखनऊ।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नेता चुनाव नहीं लड़ते, वे अपना इलाका चलाते हैं। उमाशंकर सिंह ऐसे ही नेताओं में थे।…
