जाति, न्याय और लोकतंत्र : एक असहज सच्चाई
– डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) भारत का लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक नैतिक संकल्प है—समानता, न्याय और बंधुत्व का। संविधान की प्रस्तावना इसी संकल्प का उद्घोष करती है। परंतु आज जब हम अपने चारों ओर देखते हैं, तो यह प्रश्न असहज रूप से सामने खड़ा होता है कि क्या हम…

